1 कुरि 6:4 - पहाड़ी महासुई4 अगर तुमुऐ ज़िन्दगी री बुशु रौ फैसलौ कौरणौ औलौ, का तिऊं बोशाल़ाई ज़ास कलिसिया दी कुछ़ नाईं सौमुझ़दै? Viz kapitolaबग़ल्याणी4 जे तुसा बीचे कुछ दुनिया री गल्ला रा कुछ चगड़ा ए तो फैंसला करवाणे खे बारलेया लोका गे कऊँ जाओए जो मण्डल़िया री नजरा रे कुछ नि समजे जांदे? Viz kapitola |