1 कुरि 13:2 - पहाड़ी महासुई2 और अगर हाऊं भविष्यवाणी कौरी बोलु, और सारै भेद और सारै रौंगा रै ज्ञान सौमझ़ु, और इदरा झ़ांऊ कि मुकै पुरौ विश्वास आ कि हाऊं धारै टिरै एकी ज़ागाह कु दुजी ज़ागाह लै हटाऊ। पर दुजेऊ आइलै प्यार ना छ़ाड़ु, ता हाऊं कुछ़ भी नाईं आसतौ। Viz kapitolaबग़ल्याणी2 जे आऊँ भविष्यबाणी करी सकूँ और सारे पेत और सब प्रकारा रे ज्ञानो खे समजूँ और माखे एथो तक विश्वास ओ कि आऊँ पाह्ड़ो खे टाई सकूँआ, पर प्यार नि राखूँ, तो आऊँ कुछ पनिए। Viz kapitola |