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5.0★★★★★
11 “हे हमार पंचन के प्रभू, अउर परमातिमा, अपनय महिमा, अउर मान-सम्मान, अउर सामर्थ के काबिल हएन; काहेकि अपनय सगली चीजन काहीं बनाएन हय, अउर ऊँ अपनय के मरजी से बनाई गे रही हँय, अउर बनाई गई हँय।”