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5.0★★★★★
18 कि “रामाह गाँव माहीं बड़ा दुख के बोल सुनाई दिहिस, रोउब अउर बड़ा बिलाप करब, राहेल अपने लड़िकन के खातिर रोबत रहीं हँय, अउर चुप नहीं होंइ चाहत रही, काहेकि ऊँ पंचे मरिगे रहे हँय।”