गलतियों 6 - उर्दू हमअस्र तरजुमासब का भला चाहना 1 ऐ भाईयो और बहनों! अगर कोई शख़्स किसी क़ुसूर में पकड़ा जाये तो तुम जो पाक रूह की हिदायत पर चलते हो, ऐसे शख़्स को नरम मिज़ाजी के साथ बहाल कर दो। और साथ ही अपना भी ख़्याल रखो के कहीं तुम भी किसी आज़माइश का शिकार न हो जाओ। 2 एक दूसरे का बोझ उठाने में मददगार बनो, और यूं अलमसीह की शरीअत को पूरा करो। 3 अगर कोई अपने आप को कुछ समझता है लेकिन कुछ भी नहीं है, तो वह ख़ुद को धोका देता है। 4 चुनांचे हर शख़्स अपने ही किरदार का इम्तिहान ले। तो उसे किसी दूसरे से मुक़ाबला किये बग़ैर ख़ुद ही पर फ़ख़्र करने का मौक़ा मिलेगा, 5 क्यूंके हर एक अपने ही कामों का ज़िम्मेदार है। 6 बहरहाल कलाम-ए-ख़ुदा की तालीम पाने वाला अपनी सारी अच्छी चीज़ों में अपने मुअल्लिम को भी शरीक करे। 7 फ़रेब न खाओ: ख़ुदा ठठ्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्यूंके आदमी जो कुछ बोता है वोही काटेगा। 8 अगर कोई अपनी जिस्मानी ख़ाहिशों का ख़्याल रखते हुए बोता है, तो वह मौत की फ़सल काटेगा; और जो पाक रूह का ख़्याल रखते हुए बोता है, वह अब्दी ज़िन्दगी की फ़सल काटेगा। 9 हम नेकी करने से बेज़ार न हूं क्यूंके अगर मायूस नहीं होंगे तो ऐन वक़्त पर फ़सल काटेंगे। 10 चुनांचे जहां तक मौक़ा मिले, हम सब के साथ नेकी करें, ख़ासतौर पर अहल-ए-ईमान के साथ। आख़िरी हिदायत 11 देखो! मैं अपने हाथ से कैसे बड़े-बड़े हुरूफ़ में तुम्हें लिख रहा हूं। 12 जो लोग जिस्मानी नुमूद-ओ-नुमाइश की फ़िक्र में हैं वह तुम्हें ख़तना कराने पर महज़ इसलिये मजबूर करते हैं, वह अलमसीह की सलीब के सबब से ख़ुद सताये न जायें। 13 क्यूंके ख़तना कराने वाले ख़ुद भी शरीअत पर अमल नहीं करते, लेकिन तुम्हें ख़तना कराने पर मजबूर करते हैं ताके वह फ़ख़्र कर सकें के तुम ने इस जिस्मानी रस्म को क़बूल कर लिया है। 14 ख़ुदा न करे के में किसी चीज़ पर फ़ख़्र करूं सिवा अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह की सलीब के, जिस के ज़रीये दुनिया मेरे लिये मस्लूब हो गई है और मैं दुनिया के लिये। 15 सच तो यह है के ख़तना कराना या न कराना अहम नहीं; लेकिन नई मख़्लूक़ बन जाना बड़ा अहम है। 16 और जितने इस क़ाइदे पर चलते हैं, उन सब को और ख़ुदा के इस्राईल को इत्मीनान और रहम हासिल होता रहे। 17 मुझे आख़िरी बात कहना है, कोई मुझे तकलीफ़ न दे क्यूंके में अपने बदन पर हुज़ूर ईसा के दाग़ लिये फिरता हूं। 18 ऐ भाईयो और बहनो! हमारे ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का फ़ज़ल, तुम सब की रूह के साथ होता रहे। आमीन। |
उर्दू हमअस्र तरजुमा™ नया अह्दनामा
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की इजाज़त से इस्तिमाल किया जाता है। दुनिया भर में तमाम हक़ महफ़ूज़।
Urdu Contemporary Version™ New Testament (Devanagari Edition)
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