17 जै मैहणु रिशै कातै, सै स्वार्थी ईच्छाईया केरै कारण मसीहरै बारै प्रचार कातै, पण ईमानदारी सिंउ ना, केईनी कि तैन्हांं लगतु कि सैक्यै मिंडै तेईनी जैल्हीऐ मझ जादा परेशानि पेईदा करि सकतै।