5 यौ दास सभ! अहाँ सभ जहिना मसीहक सेवा करितहुँ तहिना निष्कपट मोन सँ भय आ आदरक संग तिनका सभक आज्ञा मानू जे सभ एहि संसार मे अहाँ सभक मालिक छथि।