6 जाहि सँ हुनकर ओ अनमोल कृपाक प्रशंसा होनि, जे ओ अपन प्रिय पुत्र द्वारा अपना सभ पर कयने छथि, जकरा पाबऽ जोगरक अपना सभ छलहुँ नहि।