21 पर मरू-भुइयां के पसुमन उहां रहिहीं, सियारमन ओकर घरमन म भर जाहीं; उहां उल्लूमन के बसेरा होही, अऊ उहां जंगली बोकरामन एती-ओती कूदहीं।