21 देखव, ओ बिसवासयोग्य नगर ह कइसे एक बेस्या के सहीं हो गे हवय! एक समय रिहिस कि ओह नियाय ले भरे रिहिस; धरमीपन उहां पाय जावत रिहिस— पर अब उहां हतियारामन रहिथें!