3 उअ धन्यक हखिय, जुने अगमवाडिक इअ वचनसभ जबड स्वरमा पढसिय हसे सुन्नसइ तके वकरमा लिखलि बतवा पालन करसइ, केहकेकि इअ बतवा पुरा हखेके जुन लजिके बडइ।