22 जब जकरयाह बहिरे आएँ, त उनसे कुछू बोल न सकें: तबहिनय ऊँ पंचे जानिगें, कि ऊँ मन्दिर माहीं कउनव दरसन पाइन हीं; अउर जकरयाह उनसे इसारा करत रहिगें, काहेकि ऊँ गूँगा होइगें तय।