5 हुवाँ कबहूँ रात न होइ। अउर न तउ सूरज अथवा दीपक क रोसनी क कउनो जरुरत पड़ी। काहे बरे कि ओनके ऊपर पर्भू परमेस्सर आपन रोसनी उड़इहइँ अउर उ हमेसा सासन करिहीं।